ढाल - 1, Class - 7
तीन लोक में चार हैं, मंगल शरण व श्रेष्ठ।
अर्हत सिद्ध व साधुगण, धर्म जैन जगज्येष्ठ ॥१॥
तीर्थंकर जिनदेव की जिनवाणी को ध्याय।
सार्व धर्म संक्षेप से कहूँ चित्त हुलसाय ॥२॥