नई छहढाला
ढाल - 1, Class - 18
ढाल - 1, Class - 18
सिद्ध जीव से गुणे अनन्त तन निगोद इक जीव वसन्त।
हीरा दुर्लभ बालु समुद्र त्यों दुर्लभ त्रसता है भद्र॥६॥
बे ते चउ इन्द्रिय जे जीव विकलेन्द्रिय शंखादि अतीव।
अस्सी साठ और चालीस तिनमें क्षुद्रक भव जिन दीस॥७॥
तातें पंचेन्द्रिय पर्याय दुर्लभ गुण कृतज्ञ ज्यों आय।
पंचन्द्रिय के हैं चौबीस क्षुद्रक भव कहते जिन ईश॥8॥