नई छहढाला
ढाल - 3, Class - 35
ढाल - 3, Class - 35
अप्रमत्त गुण में मुनिवर जब श्रेणी सन्मुख होवें,
सातिशयी वह अध:करण में निज आतम में खोवें।
मोहनीय कर्मों का उपशम उपशम श्रेणी कहावे,
जिस विध कर्मों का क्षय होता क्षपक श्रेणि मढ़ जावे ॥14॥
होंय अपूर्व विशुद्ध भाव जहाँ ठन ठाण अपूर्वकरण है,
अभिवृत्ति परिणाम जहाँ हैं नवमा ठाण चरण है ।
सूक्ष्म लोभ ही शेष बचा ज्यों कौसुंभी पट लाली,
सूक्ष्म साम्परायी दशवें गुण अन्तिम राग प्रणाली ॥15॥