ढाल - 3, Class - 6
दो नय में एक ही को माने सो एकान्ति कहावे।
केवलि कवलाहार बतावे वह विपरीत रहावे ॥
वैनेयिक कह सब देवन को अरु गुरुजन को मानो,
क्या सच्चा क्या झूठा संशय ज्ञान बिना शिव ठानो ॥३॥