ढाल - 3, Class - 4
ज्यों कोई ज्वरवान पुरुष को सब कुछ कड़वो लागे
त्यों मिथ्यादृष्टि जीवन को जिनवर वचन न भावे।
प्रथम कहो तिनमें मिथ्यात्व पंच भेद उर आनो
एकान्तिक विपरीत विनय सह संशयाज्ञान बखानो॥2॥