नई छहढाला
ढाल - 1, Class - 16
ढाल - 1, Class - 16
जन्म मरण जो होय निरंतर, कहें क्षुद्र भव संज्ञा जिनवर।
छयासठ सहस इक सौ बत्तीस एकेंद्रिय के भव जिन दीस॥5॥
सिद्ध जीव से गुणे अनन्त तन निगोद इक जीव वसन्त।
हीरा दुर्लभ बालु समुद्र त्यों दुर्लभ त्रसता है भद्र॥६॥