नई छहढाला
ढाल - 3, Class - 27
ढाल - 3, Class - 27
रत्नत्रयधारी में भक्ति साधर्मी से नेह
आठ गुणों के पालन से ही सम्यग्दर्शन लेह।
चौथे से पंचम सप्तम जा आदि तीज आ जावे
लघु मुहूर्त छासठ तैंतीस सागर काल रहावे ॥10॥
बारह व्रत धर त्रस हिंसा तज थावर घात न कीजे
देशविरति पंचम गुण ठानक संयम रति निज लीजे।
असंख्यात गुण श्रेणी प्रतिपल विधि निर्जर को पावे
मध्यम अन्तर आतम सो ही मध्यम पात्र कहावे ॥११॥