ढाल - 3, Class - 33
अप्रमत्त गुण में मुनिवर जब श्रेणी सन्मुख होवें,
सातिशयी वह अध:करण में निज आतम में खोवें।
मोहनीय कर्मों का उपशम उपशम श्रेणी कहावे,
जिस विध कर्मों का क्षय होता क्षपक श्रेणि मढ़ जावे ॥14॥