ढाल - 4, Class - 7
प्रतिपदार्थ जो भी सत् दिखता है अनन्त धर्मों वाला,
कह सकता है सब धर्मों को अनेकान्त का मत वाला।
नित्य अनित्य अनेक एक या विधि निषेध दो धर्मविरुद्ध,
बना विवक्षा नय की कथनी स्याद्वाद शैली अविरुद्ध ॥९॥