नई छहढाला
ढाल - 4, Class - 10
ढाल - 4, Class - 10
क्रम से जो सत् असत् कहे वह भंग तीसरा उभय स्वरूप,
एक साथ दो कथन असम्भव, चौथा अवक्तव्य का रूप।
सत् कहने पर भी विरुद्ध द्वय सदसत् कहे नहीं जाते,
अतः पाँचवें सत् अवाच्य सम असत् अवाच्य भंग पाते॥११॥
क्रम से कहने पर दोनों को युगपत् कहना नहीं बने,
इसीलिए सदसत् अवाच्य का सप्तभंग संधान बने।
केवलज्ञानी वस्तु धर्म सब आतम से साक्षात् लखें,
वैसा ही श्रुतज्ञानी जाने नय से किन्तु परोक्ष लखें॥१२॥