ढाल - 3, Class - 25
रत्नत्रयधारी में भक्ति साधर्मी से नेह
आठ गुणों के पालन से ही सम्यग्दर्शन लेह।
चौथे से पंचम सप्तम जा आदि तीज आ जावे
लघु मुहूर्त छासठ तैंतीस सागर काल रहावे ॥10॥