ढाल - 3, Class - 18
सम्यग्दृष्टि को नित होवे धर्म धर्म फल प्रीति,
यह संवेग तथा निर्वेद भव तन भोग विरक्ति।
आत्म साक्षी का में अघ निन्दा गर्हा गुरु से कम्पा,
उपशम भाव क्षमा परिणाम सर्वप्राणि अनुकम्पा॥9॥