नई छहढाला
ढाल - 4, Class - 2
ढाल - 4, Class - 2
श्री जिनसेनादिक आचारज आदिपुराणादिक कर्ता,
प्रथम यही प्रथमानुयोग है धर्म बढ़े अघ का हर्ता।
लोक अलोक विषय संज्ञान वह करणानुयोग गाता,
यति वृषभ कृत प्रज्ञप्ति में तीन लोक की बहु गाथा॥२॥
रत्नकरण्डक आदिक ग्रन्थ श्रुत चरणानुयोग सारे,
गृही मुनि की चर्या का वर्णन ज्ञान अवश्य रखो प्यारे।
दीपक सम द्रव्यानुयोग है, जीवादिक तत्त्वों का ज्ञान,
द्रव्य गुणों अरु पर्यायों का सूत्र ग्रन्थ तत्त्वार्थ महान॥३॥