ढाल - 2, Class - 18
केवली श्रृतकेवली श्रमण सूरि, मति अंजुली से मुनिनाथ पूरि।
कलिकाल विषै जिसका प्रवाह, लाए धनि ते दिखलाय राह ॥६॥