नई छहढाला
ढाल - 3, Class - 7
ढाल - 3, Class - 7
दो नय में एक ही को माने सो एकान्ति कहावे।
केवलि कवलाहार बतावे वह विपरीत रहावे ॥
वैनेयिक कह सब देवन को अरु गुरुजन को मानो,
क्या सच्चा क्या झूठा संशय ज्ञान बिना शिव ठानो ॥३॥
गुणस्थान पहले से जीव चौथो पंचम सातें,
कोई भी इक प्राप्त कर सके भव्य जीव क्रम ना ते।
जो अनादि मिथ्या दृष्टि है चारों गति के प्राणी,
प्रथम लहें उपशम समकित को पंच लब्धिवश ज्ञानी ॥4॥