नई छहढाला
ढाल - 4, Class - 13
ढाल - 4, Class - 13
वचन भेद से भेद अपरिमित नय के जिनवर कहते हैं,
अनुभव में व्यवहार व निश्चय गुणभूमि अनु लहते हैं।
सप्तम से ही ध्यान लीन मुनि शुद्ध नयाश्रित अनुभवते,
आतम ज्ञानानन्द स्वभावी उससे पहले बस कहते ॥१४॥
नय प्रमाण से श्रुत अनुसारी वस्तु तत्त्व का ज्ञानी ही
सम्यग्ज्ञानी कहलाता है पी पीकर जिनवाणी ही।
संशय विभ्रम मोह त्याग के चारित को धारण करना
इस बिन समकित खो जाता है सूजी में धागा रखना॥ १५॥