नई छहढाला
ढाल - 4, Class - 1
ढाल - 4, Class - 1
सम्यग्दर्शन होने पर ही सम्यग्ज्ञान कहा जाता,
जिसके होने पर आतम में रत्नत्रय ही मन भाता।
प्रथम करण अरु चरण द्रव्य से मुख्य चार अनुयोग कहे,
सबका क्रम से अध्ययन करता सम्यग्ज्ञानी वही रहे ॥१॥
श्री जिनसेनादिक आचारज आदिपुराणादिक कर्ता,
प्रथम यही प्रथमानुयोग है धर्म बढ़े अघ का हर्ता।
लोक अलोक विषय संज्ञान वह करणानुयोग गाता,
यति वृषभ कृत प्रज्ञप्ति में तीन लोक की बहु गाथा॥२॥