ढाल - 3, Class - 8
गुणस्थान पहले से जीव चौथो पंचम सातें,
कोई भी इक प्राप्त कर सके भव्य जीव क्रम ना ते।
जो अनादि मिथ्या दृष्टि है चारों गति के प्राणी,
प्रथम लहें उपशम समकित को पंच लब्धिवश ज्ञानी ॥4॥