नई छहढाला
ढाल - 3, Class - 11
ढाल - 3, Class - 11
सप्त प्रकृति का उपशम जिनके, उपशम सम्यग्दृष्टि,
सम्यक् प्रकृति उदय होय यदि, वेदक सम्यग्दृष्टि।
जिनवर भक्ति बढ़ाने वाला, केवली द्वय पद मूल,
सप्त प्रकृति का क्षय कर पावे, क्षायिक भव को कूल ॥5॥
उपशम सम्यक दृष्टि के यदि, आदि कषाय उदयावे
सासादन दूजो गुणथान, ज्ञान अज्ञान कहावे।
अनंतानुबंधी कषाय का काज है समकत घाते
एक समय से छह आवलि पल गिरत समय ही पाते ॥६॥