नई छहढाला
ढाल - 4, Class - 4
ढाल - 4, Class - 4
गृह आरम्भ परिग्रह त्यागी धवल पठन के अधिकारी,
समयसार की शुद्धातम रुचि व्रत्ती जनों को हितकारी।
यह व्यवहार ज्ञान है निश्चय ज्ञानी जो मुनि सद्ध्यानी,
अल्पज्ञानि शिवभूति अमोही बन जाते केवलज्ञानी ॥५॥
नहीं ज्ञान का जिनको उद्भव वह भी शिवपथ का राही,
शास्त्र ज्ञान मति में उतरे ना णमोकार जप मन भाई।
हृदय धार चल गुरुवचनों को श्रावक हो या श्रमण रहा,
निर्मोही बन बढ़ता जाता सम्यग्ज्ञानी उसे कहा ॥६॥