ढाल - 4, Class - 5
सप्त व्यसन से रहित नित्य हो जिन भगवन की पूजा हो,
जिनमुनि नमन नेह सहधर्मी पात्र दान मन उपजा हो।
दया दीन पे श्रुत अभ्यासी सद्दर्शन व्रत रतिधारी,
सो गृहस्थ सम्यग्ज्ञानी अन मोहपाश की बलिहारी ॥७॥