नई छहढाला
ढाल - 4, Class - 6
ढाल - 4, Class - 6
पंच ज्ञान सम्यक् प्रमाण हैं तीन ज्ञान मिथ्यात्व रहे,
मति श्रुत दोय परोक्ष ज्ञान हैं प्रत्यक्षा व्यवहार कहे।
अवधिज्ञान मनपर्यय दो को देश प्रत्यक्ष कहें ज्ञानी,
केवलज्ञान सर्व प्रत्यक्षी अतः प्रमाणिक जिनवाणी ॥८॥
प्रतिपदार्थ जो भी सत् दिखता है अनन्त धर्मों वाला,
कह सकता है सब धर्मों को अनेकान्त का मत वाला।
नित्य अनित्य अनेक एक या विधि निषेध दो धर्मविरुद्ध,
बना विवक्षा नय की कथनी स्याद्वाद शैली अविरुद्ध ॥९॥