ढाल - 2, Class - 67
निज में थिरता निश्चय चरित्र, तीनो इक संग न भिन्न मित्र।
इस विधि द्वय विध जो मोक्ष मार्ग, क्रम-क्रम तें साधो भव्य जाग ॥१८॥